महामृत्युंजय मंत्र हिंदू उपासना परंपरा में श्रद्धा और ध्यान के साथ जपा जाता है। इस पृष्ठ पर मंत्र का पाठ, सरल अर्थ, सामान्य जाप विधि और इससे जुड़ी पारंपरिक मान्यताएँ दी गई हैं।
त्रिनेत्रधारी शिव की उपासना करते हुए बंधनों और मृत्यु-भय से मुक्ति तथा अमृततत्त्व की कामना की जाती है।
शांत वातावरण में रुद्राक्ष माला से 11 या 108 बार जप करें। रोग की स्थिति में इसे चिकित्सा का विकल्प न मानें।
परंपरा में यह मंत्र आरोग्य की प्रार्थना, निर्भयता, दीर्घायु और मानसिक शक्ति से जुड़ा है।